हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.25.16

मंडल 1 → सूक्त 25 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
परा॑ मे यन्ति धी॒तयो॒ गावो॒ न गव्यू॑ती॒रनु॑ । इ॒च्छन्ती॑रुरु॒चक्ष॑सम् ॥ (१६)
बहुत से लोगों ने वरुण के दर्शन किए हैं. जिस प्रकार गाएं गोशाला की ओर जाती हैं, उसी प्रकार कभी पीछे न लौटने वाली मेरी विचारधारा वरुण की ओर अग्रसर होती है. (१६)
Many people have seen Varuna. Just as the cows go towards the goshala, so my never-to-be-back ideology moves towards Varuna. (16)