हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.28.3

मंडल 1 → सूक्त 28 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
यत्र॒ नार्य॑पच्य॒वमु॑पच्य॒वं च॒ शिक्ष॑ते । उ॒लूख॑लसुताना॒मवेद्वि॑न्द्र जल्गुलः ॥ (३)
हे इंद्र! जिस यज्ञ में यजमान की पत्नियां भीतर घुसती और बाहर निकलती रहती हैं, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोमरस अपना जानकर पिओ. (३)
O Indra! In the yajna in which the wives of the host enter and go out, drink the somras prepared by Okhali in the same yajna knowing your own knowledge. (3)