हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.28.5

मंडल 1 → सूक्त 28 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
यच्चि॒द्धि त्वं गृ॒हेगृ॑ह॒ उलू॑खलक यु॒ज्यसे॑ । इ॒ह द्यु॒मत्त॑मं वद॒ जय॑तामिव दुन्दु॒भिः ॥ (५)
हे ऊखल! यद्यपि घर-घर में तुम्हारा प्रयोग किया जाता है, पर इस यज्ञ में तुम उसी प्रकार ध्वनि करते हो, जिस प्रकार विजयी लोग दुंदुभी बजाते हैं. (५)
Oh, o you! Although you are used from house to house, in this yajna you make the same sound as the victorious people play the dundubhi. (5)