हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.3.1

मंडल 1 → सूक्त 3 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
अश्वि॑ना॒ यज्व॑री॒रिषो॒ द्रव॑त्पाणी॒ शुभ॑स्पती । पुरु॑भुजा चन॒स्यत॑म् ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी भुजाएं विस्तीर्ण एवं हवि ग्रहण करने के लिए चंचल हैं. तुम शुभ कर्म के पालक हो. तुम दोनों यज्ञ का अन्न ग्रहण करो. (१)
O Ashwinikumaro! Your arms are wide and eager to grasp Havee . You are the Preserver of good deeds. Both of you take the grain of the yajna. (1)