हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.32.9

मंडल 1 → सूक्त 32 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
नी॒चाव॑या अभवद्वृ॒त्रपु॒त्रेन्द्रो॑ अस्या॒ अव॒ वध॑र्जभार । उत्त॑रा॒ सूरध॑रः पु॒त्र आ॑सी॒द्दानुः॑ शये स॒हव॑त्सा॒ न धे॒नुः ॥ (९)
वृत्र की माता वृत्र को इंद्र के प्रहार से बचाने के लिए तिरछी होकर उसके शरीर पर गिर पड़ी. इंद्र ने वृत्र की माता के नीचे के भाग पर वज्ज मारा. उस समय माता ऊपर और पुत्र नीचे था. जिस प्रकार गाय अपने बछड़े के साथ सो जाती है, उसी प्रकार वृत्र की माता दनु सदा के लिए सो गई. (९)
Vritra's mother fell on his body diagonally to save Vritra from Indra's blow. Indra hit the vajja on the lower part of Vritra's mother. At that time the mother was up and the son was down. Just as the cow sleeps with its calf, so Vritra's mother Danu fell asleep forever. (9)