हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.36.20

मंडल 1 → सूक्त 36 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 36
त्वे॒षासो॑ अ॒ग्नेरम॑वन्तो अ॒र्चयो॑ भी॒मासो॒ न प्रती॑तये । र॒क्ष॒स्विनः॒ सद॒मिद्या॑तु॒माव॑तो॒ विश्वं॒ सम॒त्रिणं॑ दह ॥ (२०)
अग्नि की ज्वालाएं चमकीली, शक्तिशाली और भयानक हैं. इसलिए उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता. हे अग्नि देव! राक्षसों, यातुधानों एवं हमारे विश्व भक्षक शत्रुओं को जलाओ. (२०)
The flames of agni are bright, powerful and terrible. So no one can destroy him. O God of agni! Burn the demons, the yatudhans, and our world-eating enemies. (20)