हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.36.4

मंडल 1 → सूक्त 36 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 36
दे॒वास॑स्त्वा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा सं दू॒तं प्र॒त्नमि॑न्धते । विश्वं॒ सो अ॑ग्ने जयति॒ त्वया॒ धनं॒ यस्ते॑ द॒दाश॒ मर्त्यः॑ ॥ (४)
हे अग्नि! वरुण, मित्र और अर्यमा-ये तीनों देव तुम्हें अपना प्राचीन दूत समझकर भली प्रकार चमकाते हैं. जो यजमान तुम्हें हवि देता है, वह तुम्हारे द्वारा सभी प्रकार की संपत्ति जीत लेता है. (४)
O agni! Varuna, friends and Aryama - these three gods make you shine well by considering you as their ancient messengers. The host who gives you the victory of all kinds of property through you. (4)