हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.39.10

मंडल 1 → सूक्त 39 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 39
असा॒म्योजो॑ बिभृथा सुदान॒वोऽसा॑मि धूतयः॒ शवः॑ । ऋ॒षि॒द्विषे॑ मरुतः परिम॒न्यव॒ इषुं॒ न सृ॑जत॒ द्विष॑म् ॥ (१०)
हे शोभन दान करने वाले मरुतो! तुम अपनी समस्त शक्ति धारण करो. हे कंपनकर्तताओ! ऋषियों से द्वेष करने वाले एवं क्रोधी शत्रु के प्रति बाण के समान अपना क्रोध व्यक्त करो. (१०)
O You who donate so much, Maruto! You must have all your power. O vibrators! Express your anger like an arrow against the enemy who hates the sages and is angry. (10)