हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.40.4

मंडल 1 → सूक्त 40 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 40
यो वा॒घते॒ ददा॑ति सू॒नरं॒ वसु॒ स ध॑त्ते॒ अक्षि॑ति॒ श्रवः॑ । तस्मा॒ इळां॑ सु॒वीरा॒मा य॑जामहे सु॒प्रतू॑र्तिमने॒हस॑म् ॥ (४)
ऋत्विज्‌ को उत्तम धन देने वाला यजमान अक्षय अन्न प्राप्त करता है. उस यजमान के निमित्त हम सुवीरा इला से याचना करते हैं. वह शत्रु का नाश करती है, पर उसे कोई नहीं मार सकता. (४)
The host who gives the best money to the ritwiz receives renewable food. We beg Suvira Ila for that host. She destroys the enemy, but no one can kill her. (4)