हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.40.5

मंडल 1 → सूक्त 40 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 40
प्र नू॒नं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्मन्त्रं॑ वदत्यु॒क्थ्य॑म् । यस्मि॒न्निन्द्रो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा दे॒वा ओकां॑सि चक्रि॒रे ॥ (५)
ब्रह्मणस्पति होता के मुख में बैठकर निश्चय ही पवित्र मंत्र बोलते हैं. उस मंत्र में इंद्र, वरुण, मित्र और अर्यमा देव निवास करते हैं. (५)
He sits in the mouth of the Brahmaspati and certainly speaks the holy mantra. Indra, Varuna, Mitra and Aryama Dev reside in that mantra. (5)