ऋग्वेद (मंडल 1)
वि दु॒र्गा वि द्विषः॑ पु॒रो घ्नन्ति॒ राजा॑न एषाम् । नय॑न्ति दुरि॒ता ति॒रः ॥ (३)
वरुणादि राजा अपने यजमान के सामने स्थित श्रु का दुर्ग तोड़कर शत्रुओं का नाश करते हैं. इसके पश्चात् वे यजमान के पापों को भी नष्ट कर देते हैं. (३)
Varunadi king destroys the enemies by breaking the fort of Shrew in front of his host. After that, they also destroy the sins of the host. (3)