हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.45.6

मंडल 1 → सूक्त 45 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
त्वां चि॑त्रश्रवस्तम॒ हव॑न्ते वि॒क्षु ज॒न्तवः॑ । शो॒चिष्के॑शं पुरुप्रि॒याग्ने॑ ह॒व्याय॒ वोळ्ह॑वे ॥ (६)
हे विविध हविरूप अन्नयुक्त एवं यजमानों के प्रियकारक अग्नि! तुम्हारी चमकीली लपटें तुम्हारे केश हैं. यजमान तुम्हें हव्य-वहन करने के लिए बुलाते हैं. (६)
O various elephants, the food-rich and beloved agni of the hosts! Your bright flames are your hairstyle. Hosts call you to carry the hawd. (6)