हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.46.3

मंडल 1 → सूक्त 46 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
व॒च्यन्ते॑ वां ककु॒हासो॑ जू॒र्णाया॒मधि॑ वि॒ष्टपि॑ । यद्वां॒ रथो॒ विभि॒ष्पता॑त् ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारो! जिस समय तुम्हारा रथ विविध शास्त्रों द्वारा प्रशंसित स्वर्ग में घोड़ों द्वारा खींचा जाता है, उसी समय हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. (३)
O Ashwinikumaro! At the same time when your chariot is pulled by horses in heaven admired by various scriptures, we praise you. (3)