हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.47.9

मंडल 1 → सूक्त 47 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
तेन॑ नास॒त्या ग॑तं॒ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । येन॒ शश्व॑दू॒हथु॑र्दा॒शुषे॒ वसु॒ मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (९)
हे नासत्यो! तुमने सूर्यकिरण तुल्य तेजस्वी जिस रथ पर धन लाकर यजमान को सदा दिया है, उसी रथ के द्वारा मधुर सोमरस पीने के लिए आओ. (९)
O nastyo! Come to drink the sweet somras through the chariot on which you have always brought money and given it to the host, as bright as the sun. (9)