हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.47.10

मंडल 1 → सूक्त 47 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
उ॒क्थेभि॑र॒र्वागव॑से पुरू॒वसू॑ अ॒र्कैश्च॒ नि ह्व॑यामहे । शश्व॒त्कण्वा॑नां॒ सद॑सि प्रि॒ये हि कं॒ सोमं॑ प॒पथु॑रश्विना ॥ (१०)
हम प्रभूत धन के स्वामी अश्विनीकुमारों को उक्थों एवं स्तोत्रों द्वारा अपने समीप बुलाते हैं. हे अश्विनीकुमारो! तुमने कण्वपुत्रों के प्रिय यज्ञ में सदा सोमपान किया है. (१०)
We call the masters of the wealth of wealth, Ashvinikumaras, close to us through camels and hymns. O Ashwinikumaro! You have always performed sompan in the beloved yagna of the Kanvaputras. (10)