ऋग्वेद (मंडल 1)
स॒ह वा॒मेन॑ न उषो॒ व्यु॑च्छा दुहितर्दिवः । स॒ह द्यु॒म्नेन॑ बृह॒ता वि॑भावरि रा॒या दे॑वि॒ दास्व॑ती ॥ (१)
हे स्वर्गपुत्री उषा! हमारे धन के साथ प्रभात करो. हे विभावरी! पर्याप्त अन्न के साथ प्रभात करो. हे देवि! तुम दानशील होकर पशुरूपी धन के साथ प्रभात करो. (१)
O daughter of heaven Usha! Dawn with our wealth. O vibhavari! Do the morning with enough food. O God! You should be charitable and observe with animal-like wealth. (1)