ऋग्वेद (मंडल 1)
विश्व॑स्य॒ हि प्राण॑नं॒ जीव॑नं॒ त्वे वि यदु॒च्छसि॑ सूनरि । सा नो॒ रथे॑न बृह॒ता वि॑भावरि श्रु॒धि चि॑त्रामघे॒ हव॑म् ॥ (१०)
हे सुनेत्री उषा! समस्त प्राणियों की चेष्टाएं एवं जीवन तुम्हीं में वर्तमान है, क्योंकि तुम्हीं अंधकार को मिटाती हो. हे विभावरी! विशाल रथ पर चढ़कर हमारे पास आओ. हे विचित्र धनसंपन्न! हमारा आह्वान सुनो. (१०)
O Sunetri Usha! The efforts and lives of all beings are present in you, because you remove darkness. O vibhavari! Climb on to the huge chariot and come to us. O you wholly rich! Listen to our call. (10)