ऋग्वेद (मंडल 1)
उषो॑ भ॒द्रेभि॒रा ग॑हि दि॒वश्चि॑द्रोच॒नादधि॑ । वह॑न्त्वरु॒णप्स॑व॒ उप॑ त्वा सो॒मिनो॑ गृ॒हम् ॥ (१)
हे उषा! प्रकाशमान आकाश से सुंदर मार्ग द्वारा आओ. लाल रंग की गाय तुम्हें सोमयुक्त यजमान के यज्ञ में ले जाए. (१)
Oh, Usha! Come by the beautiful path from the illuminating sky. Let the red cow take you to the yagna of the somayukta host. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
सु॒पेश॑सं सु॒खं रथं॒ यम॒ध्यस्था॑ उष॒स्त्वम् । तेना॑ सु॒श्रव॑सं॒ जनं॒ प्रावा॒द्य दु॑हितर्दिवः ॥ (२)
हे उषा! तुम जिस सुंदर एवं विस्तृत रथ पर बैठती हो, हे स्वर्गपुत्री! उसी रथ से आज हव्यदाता यजमान के पास आओ. (२)
Oh, Usha! The beautiful and wide chariot you sit on, O daughter of heaven! Come to the havandata host by the same chariot today. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
वय॑श्चित्ते पत॒त्रिणो॑ द्वि॒पच्चतु॑ष्पदर्जुनि । उषः॒ प्रार॑न्नृ॒तूँरनु॑ दि॒वो अन्ते॑भ्य॒स्परि॑ ॥ (३)
हे शुभ्र वर्ण वाली उषा! तुम्हारा आगमन देखकर दो पैरों वाले मनुष्य, चार पैरों वाले पशु एवं प॑खों वाले पक्षी अपने-अपने व्यापार में लग जाते हैं. (३)
O white-colored Usha! Seeing your arrival, two-legged humans, four-legged animals and birds with wings get involved in their respective trade. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
व्यु॒च्छन्ती॒ हि र॒श्मिभि॒र्विश्व॑मा॒भासि॑ रोच॒नम् । तां त्वामु॑षर्वसू॒यवो॑ गी॒र्भिः कण्वा॑ अहूषत ॥ (४)
हे उषा! तुम अंधकार का नाश करती हुई अपने तेज से सारे जगत् को प्रकाशित करो. धन चाहने वाले कण्वपुत्रं ने स्तुति वचनों से तुम्हारी प्रशंसा की है. (४)
Oh, Usha! You illuminate the whole world with your glory, destroying darkness. The wealth-seeking Kanvaputras have praised you with praise words. (4)