हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.49.3

मंडल 1 → सूक्त 49 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
वय॑श्चित्ते पत॒त्रिणो॑ द्वि॒पच्चतु॑ष्पदर्जुनि । उषः॒ प्रार॑न्नृ॒तूँरनु॑ दि॒वो अन्ते॑भ्य॒स्परि॑ ॥ (३)
हे शुभ्र वर्ण वाली उषा! तुम्हारा आगमन देखकर दो पैरों वाले मनुष्य, चार पैरों वाले पशु एवं प॑खों वाले पक्षी अपने-अपने व्यापार में लग जाते हैं. (३)
O white-colored Usha! Seeing your arrival, two-legged humans, four-legged animals and birds with wings get involved in their respective trade. (3)