हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.50.2

मंडल 1 → सूक्त 50 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
अप॒ त्ये ता॒यवो॑ यथा॒ नक्ष॑त्रा यन्त्य॒क्तुभिः॑ । सूरा॑य वि॒श्वच॑क्षसे ॥ (३)
सबको प्रकाशित करने वाले सूर्य का आगमन देखकर नक्षत्र रात्रिसहित इस प्रकार भाग जाते हैं, जिस प्रकार चोर भागते हैं. (२)
Seeing the arrival of the Sun who illuminates all, the constellations run away with the night in the same way as thieves run away. (2)