हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.50.3

मंडल 1 → सूक्त 50 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
अदृ॑श्रमस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जना॒ँ अनु॑ । भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा ॥ (३)
सूर्य की सूचना देने वाली किरणें चमकती हुई आग के समान हैं. वे एक-एक करके संपूर्ण जगत्‌ को देखती हैं. (३)
The rays of Sun are similar to the shining agni. They see the whole world one by one. (3)