हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.50.5

मंडल 1 → सूक्त 50 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
प्र॒त्यङ्दे॒वानां॒ विशः॑ प्र॒त्यङ्ङुदे॑षि॒ मानु॑षान् । प्र॒त्यङ्विश्वं॒ स्व॑र्दृ॒शे ॥ (५)
हे सूर्य! तुम मरुत्देवों एवं मनुष्यों के सामने उदय होते हो. तुम स्वर्गलोक को देखने के लिए उदय होओ. (५)
O sun! You rise before the deserts and human beings. You rise to see paradise. (5)