हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.53.11

मंडल 1 → सूक्त 53 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
य उ॒दृची॑न्द्र दे॒वगो॑पाः॒ सखा॑यस्ते शि॒वत॑मा॒ असा॑म । त्वां स्तो॑षाम॒ त्वया॑ सु॒वीरा॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः ॥ (११)
हे इंद्र! यज्ञ की समाप्ति पर उपस्थित देवों द्वारा पालित तुम्हारे मित्र तुल्य प्रिय एवं अतिशय कल्याणपात्र हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. हम तुम्हारी दया से शोभन पुत्रों एवं उत्तम दीर्घ जीवन को प्राप्त करें. (११)
O Indra! At the end of the yajna, we praise you as dear and very well-being as your friend, as your friend, as the gods present. May we receive by your mercy the glorious sons and the best long life. (11)