हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.53.6

मंडल 1 → सूक्त 53 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
ते त्वा॒ मदा॑ अमद॒न्तानि॒ वृष्ण्या॒ ते सोमा॑सो वृत्र॒हत्ये॑षु सत्पते । यत्का॒रवे॒ दश॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति ब॒र्हिष्म॑ते॒ नि स॒हस्रा॑णि ब॒र्हयः॑ ॥ (६)
हे सज्जनों के पालक इंद्र! जिस समय तुमने वृत्र असुर का वध किया, उस समय तुम्हारे मादक मरुद्गण ने तुम्हें प्रमुदित किया था. तुम वर्षा करने में समर्थ हो. जब तुमने शत्रुओं की बाधा को पार करके स्तुतिकर्ता एवं हव्यदाता यजमान के दस हजार उपद्रवो को समाप्त किया था, उस समय चरुपुरोडाशादि हव्य एवं प्रसिद्ध सोमरस ने तुम्हें प्रसन्न किया था. (६)
O lord of the gentlemen Indra! At the time when you killed the Vrithra Asura, your intoxicating deserts made you happy. You are able to rain. When you crossed the barrier of enemies and ended ten thousand mischiefs of the praise-giving and the havyadata host, at that time, charupurodasadi havya and the famous somers pleased you. (6)