ऋग्वेद (मंडल 1)
ते ज॑ज्ञिरे दि॒व ऋ॒ष्वास॑ उ॒क्षणो॑ रु॒द्रस्य॒ मर्या॒ असु॑रा अरे॒पसः॑ । पा॒व॒कासः॒ शुच॑यः॒ सूर्या॑ इव॒ सत्वा॑नो॒ न द्र॒प्सिनो॑ घो॒रव॑र्पसः ॥ (२)
दर्शनीय, पौरुषयुक्त एवं रुद्ररूप मरुद्गण अंतरिक्ष से उत्पन्न हुए हैं. मरुद्गण शत्रुनाशक, पापरहित, सबको शुद्ध करने वाले, सूर्यकिरणों के समान, रुद्रगण के तुल्य बलशाली, वर्षा की बूंदों को धारण करने वाले एवं घोर रूप हैं. (२)
The spectacular, virility and rudrarupa deserts originated from space. The deserts are hostile, sinless, purifying all, like the sun rays, as powerful as rudragana, wearing raindrops and in a profound form. (2)