हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.66.10

मंडल 1 → सूक्त 66 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
सिन्धु॒र्न क्षोदः॒ प्र नीची॑रैनो॒न्नव॑न्त॒ गावः॒ स्व१॒॑र्दृशी॑के ॥ (१०)
जिस प्रकार गाय पशुशाला में पहुंचती है, उसी प्रकार हम पशु एवं धान्य संबंधी आहुतियां लेकर प्रज्वलित अग्नि के समीप जाते हैं. वे निम्नगामी जल के समान इधर-उधर ज्वालाएं फैलाते है. दर्शनीय अग्नि की किरणें आकाश में मिल जाती हैं. (१०)
Just as the cow reaches the cowshed, similarly we take animal and grain offerings and go near the igniting fire. They spread flames here and there like falling water. The rays of visible fire get mixed in the sky. (10)