हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.74.3

मंडल 1 → सूक्त 74 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 74
उ॒त ब्रु॑वन्तु ज॒न्तव॒ उद॒ग्निर्वृ॑त्र॒हाज॑नि । ध॒नं॒ज॒यो रणे॑रणे ॥ (३)
शत्रुनाशक एवं संग्राम में शत्रु के धन पर अधिकार करने वाले अग्नि के उत्पन्न होते ही सब लोग उनकी स्तुति करें. (३)
As soon as the agni that takes over the enemy's wealth in the anti-enemy and struggle is created, let all the people praise them. (3)