हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.76.2

मंडल 1 → सूक्त 76 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
एह्य॑ग्न इ॒ह होता॒ नि षी॒दाद॑ब्धः॒ सु पु॑रए॒ता भ॑वा नः । अव॑तां त्वा॒ रोद॑सी विश्वमि॒न्वे यजा॑ म॒हे सौ॑मन॒साय॑ दे॒वान् ॥ (२)
हे अग्नि! इस यज्ञ में आओ और देवों के आह्वानकर्ता बनकर बैठी. राक्षसादि तुम्हारी हिंसा नहीं कर सकते, इसलिए तुम हमारे अग्रगामी नेता बनो. तुम समस्त आकाश एवं धरती द्वारा रक्षित होकर देवों को परम प्रसन्न करने के लिए हवि द्वारा उनकी पूजा करो. (२)
O agni! Come to this yagna and sit as the instigator of the gods. Demons can't do you violence, so you become our leading leader. You must be protected by all the heavens and the earth and worship the gods by havi to please them. (2)