हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.76.3

मंडल 1 → सूक्त 76 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
प्र सु विश्वा॑न्र॒क्षसो॒ धक्ष्य॑ग्ने॒ भवा॑ य॒ज्ञाना॑मभिशस्ति॒पावा॑ । अथा व॑ह॒ सोम॑पतिं॒ हरि॑भ्यामाति॒थ्यम॑स्मै चकृमा सु॒दाव्ने॑ ॥ (३)
हे अग्नि! समस्त राक्षसों को भली प्रकार नष्ट करके हिंसा से यज्ञ की रक्षा करो. संपूर्ण सोमरसों के पालनकर्ता इंद्र को उसके हरि नामक अश्वों सहित इस यज्ञ में लाओ, क्योंकि हम शोभन फलदाता इंद्र का अतिथि सत्कार करेंगे. (३)
O agni! Protect the yajna from violence by destroying all the demons well. Bring Indra, the lord of the entire Somras, to this yagna with his horses called Hari, for we will be the guest of The Shobhan Fruit donor Indra. (3)