ऋग्वेद (मंडल 1)
यु॒क्तस्ते॑ अस्तु॒ दक्षि॑ण उ॒त स॒व्यः श॑तक्रतो । तेन॑ जा॒यामुप॑ प्रि॒यां म॑न्दा॒नो या॒ह्यन्ध॑सो॒ योजा॒ न्वि॑न्द्र ते॒ हरी॑ ॥ (५)
हे शतक्रतु! तुम्हारे रथ की दाई एवं बाई ओर घोड़े जुड़े हों. सोमरूप अन्न के उपभोग से मस्त होकर तुम उसी रथ द्वारा अपनी प्रेयसी के समीप जाओ. (५)
O century! Let the horses be attached to the right and left side of your chariot. After consuming somrupa food, you go to your beloved by the same chariot. (5)