हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.82.6

मंडल 1 → सूक्त 82 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
यु॒नज्मि॑ ते॒ ब्रह्म॑णा के॒शिना॒ हरी॒ उप॒ प्र या॑हि दधि॒षे गभ॑स्त्योः । उत्त्वा॑ सु॒तासो॑ रभ॒सा अ॑मन्दिषुः पूष॒ण्वान्व॑ज्रि॒न्समु॒ पत्न्या॑मदः ॥ (६)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारे शिखा वाले घोड़े को मैं स्तोत्र रूपी मंत्र की सहायता से तुम्हारे रथ में जोड़ता हूं. दोनों बाहुओं में घोड़ों की रास पकड़कर अपने घर जाओ. तुम निचोड़े हुए तीखे सोम से मतवाले होकर अपनी प्रेयसी के साथ मोद प्राप्त करो. (६)
O thunderbolt Indra! I add your crest horse to your chariot with the help of a hymn-like mantra. Go home holding the rods of horses in both arms. You are mated with the squeezed sharp mon and get the mod with your beloved. (6)