हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.84.4

मंडल 1 → सूक्त 84 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 84
इ॒ममि॑न्द्र सु॒तं पि॑ब॒ ज्येष्ठ॒मम॑र्त्यं॒ मद॑म् । शु॒क्रस्य॑ त्वा॒भ्य॑क्षर॒न्धारा॑ ऋ॒तस्य॒ साद॑ने ॥ (४)
हे इंद्र! अतिशय प्रशंसनीय, अमारक एवं मादक सोम को पिओ. यज्ञ संबंधी घर में वर्तमान तेजस्वी सोम की धाराएं तुम्हारी ओर बहती हैं. (४)
O Indra! Drink the most praiseworthy, imperceptible and intoxicating mon. The current streams of The Tejasvi Soma flow towards you in the sacrificial house. (4)