हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.84.3

मंडल 1 → सूक्त 84 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 84
आ ति॑ष्ठ वृत्रह॒न्रथं॑ यु॒क्ता ते॒ ब्रह्म॑णा॒ हरी॑ । अ॒र्वा॒चीनं॒ सु ते॒ मनो॒ ग्रावा॑ कृणोतु व॒ग्नुना॑ ॥ (३)
हे शत्रुविध्वंसकारी इंद्र! तुम्हारे दोनों घोड़ों को हमने मंत्र द्वारा रथ में जोड़ दिया है, इसलिए रथ पर चढ़ो. सोम कूटने के लिए प्रयुक्त पत्थर का शब्द तुम्हारा मन हमारी ओर फेरे. (३)
O you who are hostile, Indra! We have added both your horses to the chariot by mantra, so climb on the chariot. The word of stone used to code som turn your mind towards us. (3)