ऋग्वेद (मंडल 1)
गोमा॑तरो॒ यच्छु॒भय॑न्ते अ॒ञ्जिभि॑स्त॒नूषु॑ शु॒भ्रा द॑धिरे वि॒रुक्म॑तः । बाध॑न्ते॒ विश्व॑मभिमा॒तिन॒मप॒ वर्त्मा॑न्येषा॒मनु॑ रीयते घृ॒तम् ॥ (३)
भूमिपुत्र मरुद्गण अपने को शोभासंपन्न करते समय उज्ज्वल आभूषण धारण करते हैं. ये सभी शत्रुओं का नाश करते हैं. इनके मार्ग का अनुगमन करके पानी बरसता है. (३)
The sons of earth marudganas wear bright ornaments while adorning themselves. They destroy all enemies. Water flows down by following their path. (3)