ऋग्वेद (मंडल 1)
आ प्या॑यस्व॒ समे॑तु ते वि॒श्वतः॑ सोम॒ वृष्ण्य॑म् । भवा॒ वाज॑स्य संग॒थे ॥ (१६)
हे सोम! तुम वृद्धि प्राप्त करो एवं तुम्हें चारों ओर अपनी शक्ति प्राप्त हो. तुम हमें अन्न देने वाले बनो. (१६)
O Mon! You get growth and you have your power all around. You become the giver of food to us. (16)