ऋग्वेद (मंडल 1)
दे॒वेन॑ नो॒ मन॑सा देव सोम रा॒यो भा॒गं स॑हसावन्न॒भि यु॑ध्य । मा त्वा त॑न॒दीशि॑षे वी॒र्य॑स्यो॒भये॑भ्यः॒ प्र चि॑कित्सा॒ गवि॑ष्टौ ॥ (२३)
हे बलवान् सोमदेव! हमारे धन का अपहरण करने वाले शत्रुओं से युद्ध करो. कोई भी शरु तुम्हें नष्ट न करे. युद्धरत दोनों पक्षों के बल के स्वामी तुम्हीं हो. युद्ध में हमारे उपद्रवों का नाश करो. (२३)
O Balwan Somdev! Fight the enemies who hijack our wealth. Let no one destroy you. You are the master of the force of both sides of the war. Destroy our nuisances in war. (23)