ऋग्वेद (मंडल 1)
त्वमि॒मा ओष॑धीः सोम॒ विश्वा॒स्त्वम॒पो अ॑जनय॒स्त्वं गाः । त्वमा त॑तन्थो॒र्व१॒॑न्तरि॑क्षं॒ त्वं ज्योति॑षा॒ वि तमो॑ ववर्थ ॥ (२२)
हे सोम! तुमने धरती पर वर्तमान समस्त ओषधियां, वर्षा का जल एवं गाएं बनाई हैं. तुमने विस्तीर्ण आकाश को फैलाया एवं प्रकाश द्वारा उसका अंधकार मिटाया है. (२२)
Hey Mon! You have made all the present-day herbs, rainwater and cows on earth. You have spread out the vast sky and have removed its darkness by light. (22)