हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.94.4

मंडल 1 → सूक्त 94 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 94
भरा॑मे॒ध्मं कृ॒णवा॑मा ह॒वींषि॑ ते चि॒तय॑न्तः॒ पर्व॑णापर्वणा व॒यम् । जी॒वात॑वे प्रत॒रं सा॑धया॒ धियोऽग्ने॑ स॒ख्ये मा रि॑षामा व॒यं तव॑ ॥ (४)
हे अग्नि! हम तुम्हारे यज्ञ के लिए ईधन एकत्र करते हैं एवं प्रति पर्व पर दर्शपौर्णमास यज्ञ करते हुए तुम्हें ज्ञान कराकर हव्य देते हैं. तुम हमारे जीवनकाल को बढ़ाने के लिए यज्ञ पूर्ण कराओ. तुम हमारे मित्र बन गए हो, अब कोई हमारी हिंसा न करे. (४)
O agni! We collect fuel for your yajna and give you knowledge by doing darsapoornamas yajna on every festival. You complete the yajna to extend our lifetime. You have become our friend, let no one violence us anymore. (4)