हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.97.5

मंडल 1 → सूक्त 97 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
प्र यद॒ग्नेः सह॑स्वतो वि॒श्वतो॒ यन्ति॑ भा॒नवः॑ । अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ॥ (५)
शत्रुओं को पराजित करने वाली अग्नि की किरणें सभी जगह जाती हैं, इसलिए हमारे पाप नष्ट हों. (५)
The rays of agni that defeat enemies go all over the place, so may our sins perish. (5)