हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.102.3

मंडल 10 → सूक्त 102 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 102
अ॒न्तर्य॑च्छ॒ जिघां॑सतो॒ वज्र॑मिन्द्राभि॒दास॑तः । दास॑स्य वा मघव॒न्नार्य॑स्य वा सनु॒तर्य॑वया व॒धम् ॥ (३)
हे इंद्र! हमें मारने के इच्छुक शत्रुओं पर वज्र चलाओ. हे धनस्वामी! हमारा शत्रु दास हो या आर्य तुम गुप्त रूप से उसे मारो. (३)
O Indra! Use the vajra on enemies wishing to kill us. O lord! destroy all enemies secretly, whether arya or a servant. (3)