ऋग्वेद (मंडल 10)
किमि॒च्छन्ती॑ स॒रमा॒ प्रेदमा॑नड्दू॒रे ह्यध्वा॒ जगु॑रिः परा॒चैः । कास्मेहि॑तिः॒ का परि॑तक्म्यासीत्क॒थं र॒साया॑ अतरः॒ पयां॑सि ॥ (१)
पणि बोले-“हे सरमा! तुम क्या अभिलाषा करती हुई यहां आई हो? इधर यह मार्ग बहुत दूर का एवं चक्कर वाला है, इस पर चलना कठिन है. हमारे पास ऐसी कौन सी वस्तु है, जिसके लिए तुम आई हो? तुम्हें आने में कितनी रातें लगीं और तुमने नदी कैसे पार की?” (१)
Pani said, "Hey Sarma! What have you come here wishing for? Here this path is very far and round, it is difficult to walk on it. What kind of thing do we have that you have come for? How many nights did it take you to come and how did you cross the river?" (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
इन्द्र॑स्य दू॒तीरि॑षि॒ता च॑रामि म॒ह इ॒च्छन्ती॑ पणयो नि॒धीन्वः॑ । अ॒ति॒ष्कदो॑ भि॒यसा॒ तन्न॑ आव॒त्तथा॑ र॒साया॑ अतरं॒ पयां॑सि ॥ (२)
सरमा बोली-“हे पणियो! मैं इंद्र की दूती हूं और उन्हीं के भेजने से आई हूं. मैं तुम्हारे द्वारा एकत्रित गायों रूपी निधि को लेने की इच्छा से आई हूं. मेरी छलांग से डरकर नदी के जल ने मुझे बचाया. इस प्रकार मैंने नदी का जल पार किया.” (२)
Sarma said, "Hey pani! I am indra's messenger and i have come from his sending. I came from the desire to take the cows collected by you. The water of the river saved me by being afraid of my jump. That's how I crossed the river water." (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
की॒दृङ्ङिन्द्रः॑ सरमे॒ का दृ॑शी॒का यस्ये॒दं दू॒तीरस॑रः परा॒कात् । आ च॒ गच्छा॑न्मि॒त्रमे॑ना दधा॒माथा॒ गवां॒ गोप॑तिर्नो भवाति ॥ (३)
पणियों ने कहा-“हे सरमा! तुम जिस इंद्र की दूती बनकर इतनी दूर आई हो, वह कैसा है और उसकी सेना कैसी है? इंद्र यहा आवें. हम उन्हें मित्र स्वीकार करेंगे. वे हमारी गायों के स्वामी बन जावें.” (३)
The men said, "This is Sarma! How is the Indra whose angel you have come so far and what is his army like? Indra should come here. We will accept them as friends. Let them become the masters of our cows." (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
नाहं तं वे॑द॒ दभ्यं॒ दभ॒त्स यस्ये॒दं दू॒तीरस॑रं परा॒कात् । न तं गू॑हन्ति स्र॒वतो॑ गभी॒रा ह॒ता इन्द्रे॑ण पणयः शयध्वे ॥ (४)
सरमा बोली-“हे पणियो! मैं उन इंद्र के हराने वाले को नहीं जानती. वे सबका नाश करते हैं. गहरी नदियां भी उन्हें नहीं रोक पातीं. वे तुम्हें मारकर धरती पर सुला देंगे.” (४)
Sarma said, "This is a panio! I don't know those Indra's losers. They destroy everyone. Even deep rivers can't stop them. They will kill you and put you to sleep on earth." (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
इ॒मा गावः॑ सरमे॒ या ऐच्छः॒ परि॑ दि॒वो अन्ता॑न्सुभगे॒ पत॑न्ती । कस्त॑ एना॒ अव॑ सृजा॒दयु॑ध्व्यु॒तास्माक॒मायु॑धा सन्ति ति॒ग्मा ॥ (५)
पणियों ने कहा-—“हे स्वर्ग की अंतिम सीमा से आने वाली सुंदरी सरमा! इन गायों में से तुम जिन्हें चाहो, उन्हें ले सकती हो. युद्ध के बिना ये गाएं तुम्हें कौन देता? वैसे हमारे पास भी तीखे आयुध हैं.” (५)
The panis said – “O beautiful Sarma who comes from the last limits of heaven! of these cows You can take whomever you want. Who would have given you these songs without war? Well we have sharp weapons.” (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒से॒न्या वः॑ पणयो॒ वचां॑स्यनिष॒व्यास्त॒न्वः॑ सन्तु पा॒पीः । अधृ॑ष्टो व॒ एत॒वा अ॑स्तु॒ पन्था॒ बृह॒स्पति॑र्व उभ॒या न मृ॑ळात् ॥ (६)
सरमा बोली-“हे पणियो! तुम्हारी बातें सैनिकों की बातों के समान नहीं हैं. तुम्हारे पापी शरीर कहीं इंद्र के बाणों के शिकार न हो जावें? कहीं तुम्हारा मार्ग आक्रमणकारी देवों द्वारा पददलित न हो जाए? मेरी बात न मानने पर कहीं बृहस्पति तुम्हें कष्ट न दें.” (६)
Sarma said, "Hey pani! Your talk is not the same as the words of the soldiers. Shouldn't your sinful bodies fall prey to Indra's arrows? Will your path not be overthrown by the invading gods? If you don't obey me, don't let Brahaspati (Jupiter) hurt you." (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒यं नि॒धिः स॑रमे॒ अद्रि॑बुध्नो॒ गोभि॒रश्वे॑भि॒र्वसु॑भि॒र्न्यृ॑ष्टः । रक्ष॑न्ति॒ तं प॒णयो॒ ये सु॑गो॒पा रेकु॑ प॒दमल॑क॒मा ज॑गन्थ ॥ (७)
पणियों ने कहा—“हे सरमा! हमारी गायरूपी संपत्ति पर्वतों द्वारा सुरक्षित है. यह गायों, घोड़ों और धनों से प्राप्त है. रक्षणसमर्थ पणि इस संपत्ति की रक्षा करते हैं. गायों के रंभाने के शब्द से सुशोभित हमारे इस स्थान पर तुम व्यर्थ आई हो.” (७)
The men said, "O Sarma! Our cow-like property is protected by the mountains. It is derived from cows, horses and wealth. The protective assets protect this property. You have come to this place of ours in vain, adorned with the sound of cows." (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
एह ग॑म॒न्नृष॑यः॒ सोम॑शिता अ॒यास्यो॒ अङ्गि॑रसो॒ नव॑ग्वाः । त ए॒तमू॒र्वं वि भ॑जन्त॒ गोना॒मथै॒तद्वचः॑ प॒णयो॒ वम॒न्नित् ॥ (८)
सरमा बोली-“सोमपान करके मतवाले अंगिरागोत्रीय अयास्य ऋषि एवं नवगु ऋषियों का समूह यहां आएगा. वे इस गोधन का विभाग करके ले जावेंगे. उस समय तुमको यह अभिमान भरा वचन छोड़ना पड़ेगा.” (८)
Sarma said, "A group of Angiragotriya Ayasya Rishis and Navgu rishis will come here. They will take this godhan to the department. At that time you have to give up this proud promise." (8)