ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒यं नि॒धिः स॑रमे॒ अद्रि॑बुध्नो॒ गोभि॒रश्वे॑भि॒र्वसु॑भि॒र्न्यृ॑ष्टः । रक्ष॑न्ति॒ तं प॒णयो॒ ये सु॑गो॒पा रेकु॑ प॒दमल॑क॒मा ज॑गन्थ ॥ (७)
पणियों ने कहा—“हे सरमा! हमारी गायरूपी संपत्ति पर्वतों द्वारा सुरक्षित है. यह गायों, घोड़ों और धनों से प्राप्त है. रक्षणसमर्थ पणि इस संपत्ति की रक्षा करते हैं. गायों के रंभाने के शब्द से सुशोभित हमारे इस स्थान पर तुम व्यर्थ आई हो.” (७)
The men said, "O Sarma! Our cow-like property is protected by the mountains. It is derived from cows, horses and wealth. The protective assets protect this property. You have come to this place of ours in vain, adorned with the sound of cows." (7)