ऋग्वेद (मंडल 10)
इति॑ त्वाग्ने वृष्टि॒हव्य॑स्य पु॒त्रा उ॑पस्तु॒तास॒ ऋष॑योऽवोचन् । ताँश्च॑ पा॒हि गृ॑ण॒तश्च॑ सू॒रीन्वष॒ड्वष॒ळित्यू॒र्ध्वासो॑ अनक्ष॒न्नमो॒ नम॒ इत्यू॒र्ध्वासो॑ अनक्षन् ॥ (९)
हे अग्नि! वृष्टिहव्य ऋषि के उपस्तुत आदि पुत्रों ने इस प्रकार तुम्हारी स्तुति की है. तुम उन स्तोताओं तथा विद्वानों की रक्षा करो. उन्होंने वषट्कार एवं नमोनमः शब्द से तुम्हारी स्तुति की है. (९)
O agni! The adi sons of The Sage Vrustihavya have praised you in this way. You protect those psalmists and scholars. He has praised you with the words Shattkar and Namonamah. (9)