हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
इति॒ वा इति॑ मे॒ मनो॒ गामश्वं॑ सनुया॒मिति॑ । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (१)
मेरी इच्छा है कि मैं भी गाय और घोड़े का दान करूं. मैं कई बार सोमरस पी चुका हूं. (१)
I wish I could also donate a cow and a horse. I've had somers drinking many times. (1)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
प्र वाता॑ इव॒ दोध॑त॒ उन्मा॑ पी॒ता अ॑यंसत । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (२)
पिया हुआ सोमरस मुझे उसी प्रकार कंपित करता एवं ऊपर उठाता है, जिस प्रकार वायु को कंपाता है. मैं कई बार सोमरस पी चुका हूं. (२)
The drunk somras vibrates and lifts me up in the same way as the air vibrates. I've had somers drinking many times. (2)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
उन्मा॑ पी॒ता अ॑यंसत॒ रथ॒मश्वा॑ इवा॒शवः॑ । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (३)
पिए हुए सोमरस ने मुझे इस प्रकार ऊपर उठाया है, जिस प्रकार तेज चाल वाले घोड़े रथ को ऊपर उठाते हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (३)
The drunk somras has lifted me up in the same way that the fast-moving horses lift up the chariot. I've been to sompan several times. (3)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
उप॑ मा म॒तिर॑स्थित वा॒श्रा पु॒त्रमि॑व प्रि॒यम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (४)
जिस प्रकार गाय रंभाती हुई बछड़े के पास जाती है, उसी प्रकार स्तुतियां मेरे पास आती हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (४)
Just as the cow goes to the fastening calf, so so the praises come to me. I've been to sompan several times. (4)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
अ॒हं तष्टे॑व व॒न्धुरं॒ पर्य॑चामि हृ॒दा म॒तिम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (५)
त्वष्टा जिस प्रकार रथ में सारथि के बैठने का स्थान बनाता है, उसी प्रकार मैं स्तोता के मन में स्तुति उत्पन्न करता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (५)
Just as the tvastha makes a place for the charioteer to sit, so I evoke praise in the mind of the stotha. I've been to sompan several times. (5)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
न॒हि मे॑ अक्षि॒पच्च॒नाच्छा॑न्त्सुः॒ पञ्च॑ कृ॒ष्टयः॑ । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (६)
पंचजन मेरे दृष्टिपात से बच नहीं सकते. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (६)
Panchjans can't escape my sight. I've been to sompan several times. (6)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
न॒हि मे॒ रोद॑सी उ॒भे अ॒न्यं प॒क्षं च॒न प्रति॑ । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (७)
द्यावा-पृथिवी मेरे एक भाग के भी समान नहीं हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (७)
Dyava-Prithvivi is not the same as a part of me. I've been to sompan several times. (7)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 119
अ॒भि द्यां म॑हि॒ना भु॑वम॒भी॒३॒॑मां पृ॑थि॒वीं म॒हीम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (८)
मैंने अपने महत्त्व से द्यौ एवं विशाल धरती को पराजित किया है. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (८)
I have defeated the vast earth and the vast earth by my importance. I've been to sompan several times. (8)
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