ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒भि द्यां म॑हि॒ना भु॑वम॒भी॒३॒॑मां पृ॑थि॒वीं म॒हीम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (८)
मैंने अपने महत्त्व से द्यौ एवं विशाल धरती को पराजित किया है. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (८)
I have defeated the vast earth and the vast earth by my importance. I've been to sompan several times. (8)