ऋग्वेद (मंडल 10)
दि॒वि मे॑ अ॒न्यः प॒क्षो॒३॒॑ऽधो अ॒न्यम॑चीकृषम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (११)
मेरा एक भाग स्वर्ग में है एवं दूसरा मैंने धरती पर स्थिर किया है. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (११)
One part of me is in heaven and the other is fixed on earth. I've been to sompan several times. (11)