हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.124.5

मंडल 10 → सूक्त 124 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 124
निर्मा॑या उ॒ त्ये असु॑रा अभूव॒न्त्वं च॑ मा वरुण का॒मया॑से । ऋ॒तेन॑ राज॒न्ननृ॑तं विवि॒ञ्चन्मम॑ रा॒ष्ट्रस्याधि॑पत्य॒मेहि॑ ॥ (५)
मेरे आते ही राक्षस शक्तिहीन हो गए. हे वरुण! तुम भी मेरी अभिलाषा करते हो. हे राजन्‌! तुम सत्य से मिथ्या को अलग करते हुए मेरे राष्ट्र के अधिपति बनो. (५)
The demons became powerless as soon as I arrived. Hey Varun! You also wish me. Oh, King! You separate the falsehood from the truth, and be the lords of my nation. (5)