हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.133.5

मंडल 10 → सूक्त 133 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 133
यो न॑ इन्द्राभि॒दास॑ति॒ सना॑भि॒र्यश्च॒ निष्ट्यः॑ । अव॒ तस्य॒ बलं॑ तिर म॒हीव॒ द्यौरध॒ त्मना॒ नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु ॥ (५)
हे इंद्र! हमारे समान जन्म वाला जो नीच शत्रु हमें नष्ट करना चाहता है, उसकी शक्ति को इस प्रकार नीचा दिखाओ, जिस प्रकार आकाश धरती को अपने से नीचा रखता है. हमारे शत्रुओं के धनुषों की डोरियां नष्ट हों. (५)
O Indra! Let down the power of the lowly enemy who is born like us who wants to destroy us in the same way that the sky puts the earth down from itself. Let the cords of the bows of our enemies be destroyed. (5)