हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.14.16

मंडल 10 → सूक्त 14 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 14
त्रिक॑द्रुकेभिः पतति॒ षळु॒र्वीरेक॒मिद्बृ॒हत् । त्रि॒ष्टुब्गा॑य॒त्री छन्दां॑सि॒ सर्वा॒ ता य॒म आहि॑ता ॥ (१६)
यम त्रिकद्रुक नामक यज्ञ को प्राप्त करते हैं, छः स्थानों में रहते हैं एवं एक विस्तृत संसार में घूमते है. त्रिष्टुप्‌, गायत्री आदि सब छंद यम की स्तुति में प्रयुक्त हैं. (१६)
Yama attains a yajna called Trikdruk, lives in six places and roams in a wide world. All the verses like Trishtup, Gayatri etc. are used in praise of Yama. (16)