ऋग्वेद (मंडल 10)
उदी॑रता॒मव॑र॒ उत्परा॑स॒ उन्म॑ध्य॒माः पि॒तरः॑ सो॒म्यासः॑ । असुं॒ य ई॒युर॑वृ॒का ऋ॑त॒ज्ञास्ते नो॑ऽवन्तु पि॒तरो॒ हवे॑षु ॥ (१)
उत्तम, मध्यम और अधम--तीनों श्रेणियों के पितर कृपा करते हुए हमारा हवि ग्रहण करें. हमारी हिंसा न करने वाले और हमारे यज्ञों को जानने वाले जो पितर हमारी प्राणरक्षा करने आए हैं, वे यज्ञों में हमारी रक्षा करें. (१)
Best, Medium and Poor - Please accept our greetings in all the three categories. Those who do not do our violence and know our sacrifices, let the fathers who have come to protect our lives protect us in the yagnas. (1)